रेकी क्या है ?
हमारा देश आध्यात्मिक शक्तियों से संपन्ना देश है। हजारों वर्ष पूर्व भारत में स्पर्श चिकित्सा का ज्ञान था। अथर्ववेद में इसके प्रमाण पाए गए हैं, किंतु गुरु-शिष्य परंपरा के कारण यह विद्या मौखिक रूप से ही रही। लिखित में यह विद्या न होने से धीरे-धीरे इस विद्या का लोप होता चला गया। 2500 वर्ष पहले भगवान बुद्ध ने ये विद्या अपने शिष्यों को सिखाई ताकि देशाटन के समय जंगलों में घूमते हुए उन्हें चिकित्सा सुविधा का अभाव न हो और वे अपना उपचार कर सकें। भगवान बुद्ध की 'कमल सूत्र' नामक किताब में इसका कुछ वर्णन है।
रेकी जापानी भाषा का शब्द है जो ‘ रे ‘ और ‘ की ‘ दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘ रे ‘ का अर्थ है सर्वव्यापी अर्थात ओम्नीप्रेजेंट तथा ‘ की ‘ का अर्थ है जीवन शक्ति या प्राण अर्थात लाइफ फोर्स। इस प्रकार रेकी वह ईश्वरीय अथवा आध्यात्मिक ऊर्जा है , जो इस समस्त ब्रह्माण्ड में हमारे चारों ओर व्याप्त है। हम सब इसी जीवन शक्ति को लेकर पैदा होते हैं और इसी के द्वारा जीवन जीते हैं। समय के साथ-साथ अनेक कारणों से जब हमारे शरीर में इस ऊर्जा का प्रवाह कम हो जाता है अथवा इसका संतुलन बिगड़ जाता है , तभी हमारा शरीर रोगों की ओर आकर्षित होता है।
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